बैंक के पूर्व एमडी जॉय थॉमस ने कहा- RBI के नियमों का उल्लंघन कर रहा था पीएमसी बैंक

पंजाब एंड महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव बैंक के पूर्व एमडी जॉय थॉमस ने स्वीकार कर लिया है कि बैंक पिछले छह से सात सालों से भारतीय रिजर्व बैंक के नियमों का उल्लंघन कर रहा था और एचडीआईएल के साथ बैंक का लंबे समय से संबंध था।

पीएमसी ने दे रखा है 8300 करोड़ का लोन
साल 2015 में बैंक ने एचडीआईएल के बोर्ड में शामिल वरियम सिंह को चेयरमैन बनाया था। इस संदर्भ में पूर्व एमडी ने कहा कि एचडीआईएल में बैंक का कुल 2,500 करोड़ रुपये का एक्सपोजर है। फिलहाल पीएमसी बैंक ने कुल 8300 करोड़ रुपये का लोन दे रखा है, जिसमें एचडीआईएल को जो लोन दिया है वो कुल लोन राशि का 31 फीसदी है। यह आरबीआई द्वारा तय किए 15 फीसदी के मानक से काफी ज्यादा है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, एक्सपोजर सीमा को पार करने की सूचना बैंक ने आरबीआई को नहीं दी थी। थॉमस के मुताबिक बैंक अत्यधिक तेजी से विकास करना चाहता था। इसलिए कार्रवाई होने की वजह से बैंक ने एक्सपोजर की घोषणा नहीं की थी।

एचडीआईएल देता था 50 फीसदी कारोबार
बैंक में एचडीआईएल सबसे पुराना ग्राहक था। थॉमस के अनुसार केवल एचडीआईएल ही बैंक के कुल टर्नओवर का 50 फीसदी बिजनेस देता है। 1988 में जब बैंक में कोई पैसा जमा नहीं कर रहा था, तब इस कंपनी ने 13 लाख रुपये जमा किए थे। पीएमसी बैंक पर भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा बंदिश लगाने की पूरी सच्चाई सामने आ चुकी है। जिस रियल एस्टेट कंपनी एचडीआईएल पर 2500 करोड़ रुपये का लोन था, उसके मालिक को ही बैंक अलग से 96.5 करोड़ रुपये का लोन दिया था, ताकि वो दूसरे बैंक से लिए गए लोन को चुकता कर सके।

एक महीने पहले दिया लोन
मुंबई से प्रकाशित एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, पीएमसी बैंक ने एक माह पहले ही एचडीआईएल के मालिक सारंग वधावन को यह पर्सनल लोन दिया था ताकि वो बैंक ऑफ इंडिया से लिए गए लोन की भरपाई कर सकें। बैंक ऑफ इंडिया ने लोन की किश्त जमा नहीं करने पर एचडीआईएल के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया शुरू करने के लिए नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) में याचिका दायर की थी। बैंक ऑफ इंडिया से कंपनी ने 520 करोड़ रुपये का लोन ले रखा था।

इसलिए लगाया प्रतिबंध
अनियमितता बरतने के आरोप में भारतीय रिजर्व बैंक ने मुंबई स्थित पंजाब एंड महाराष्ट्र सहकारी बैंक पर छह महीने का प्रतिबंध लगाया है। आरबीआई ने कार्रवाई बैंकिग रेलुगेशन एक्ट, 1949 के सेक्शन 35ए के तहत की है। प्रतिबंध सेक्शन 35 A के तहत लगाया गया है।

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