MIRAGE 2000 ने कारगिल युद्ध में भी दी थी पाकिस्तान को मात

नई दिल्ली. कारगिल युद्ध के वक्त मिराज लड़ाकू विमान भारतीय वायुसेना के लिए वरदान साबित हुआ था. कारगिल युद्ध में भारतीय वायुसेना के दो विमानों एक MiG-21 और एक Mi-17 हेलीकॉप्टर को पाकिस्तानी सेना ने मार गिराया था. जिसमें पांच पायलट और वायुसैनिक शहीद हो गए थे.

इस हमले से वायुसेना को इलाके में उस वक्त अपनी रणनीति बदलनी पड़ी थी. भारतीय लड़ाकू विमानों को पाकिस्तानी मिसाइलों के निशाने से बचने के लिए समुद्र तल से 33,000 फीट की उंचाई पर उड़ना पड़ रहा था.

भारतीय वायुसेना के जाबांज पायलटों को बम बरसाने के लिए खतरनाक ढंग से सीधा गोता लगाना पड़ता था. जिसका फायदा उठाते हुए पाकिस्तानी सैनिक भारतीय विमानों पर ताबड़तोड फायरिंग कर रहे थे.

तब भारतीय वायुसेना ने 15 हजार फीट से ज्यादा ऊंचाई पर मिराज ने युद्ध के दौरान 500 उड़ानें भरीं और लेजर गाइडेड बम के सटीक हमले करके 55 हजार किलो विस्फोटक गिराकर विपक्षी खेंमें में तबाही मचा दी.

भारतीय पायलटों के अदम साहस और मिराज की उम्दा तकनीक की बदौलत दुश्मनों को युद्ध के मैदान से पीछे हटना पड़ा. कारगिल की पहाड़ियों में छिपे दुश्मन को ढूंढकर निशाना बनाना कतई आसान नहीं था.

जब सेना के जवानों पर दुश्मन भारी पड़ने लगे तो उन्हें खोजकर मारने की जिम्मेदारी ग्वालियर एयरबेस पर तैनात मिराज एयरक्राफ्ट के स्क्वॉड्रन को सौंपी गई. युद्ध के दौरान परमिशन मिलने पर मिराज के दो स्क्वॉड्रन टाइगर और बैटल एक्स ने एयरक्राफ्ट में लेजर गाइडेड बम लोड किए.

मिराज के जरिए इन घातक बमों के सटीक निशानें पर फेंका गया. बम के धमाके में कारगिल की पहाड़ियों में छिपे दुश्मनों का सफाया कर युद्ध का रूख भारत की तरफ मोड दिया. मिराज के डर से दुश्मन के खेमे इतना सहम गया था कि पाक के एयरक्राफ्ट सामने नहीं आ पाए.

युद्ध के वक्त मिराज ने कारगिल को दूसरों के लिए नो फ्लाई जोन बना दिया. इससे दुश्मन की कमर टूट गई. जिसके बाद भारतीय सैनिकों ने टाइगर हिल के साथ पहाड़ की कई चोटियों पर दुश्मनों को भगाकर और अपने कब्जे में ले लिया.

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