शहीद विनोद कुमार का पार्थिव शरीर पहुंचा गांव, उमड़ा जनसैलाब

ऐसे में शहीद के अंतिम यात्रा में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में लोग जुट रहे हैं। शहीद के घर केंद्रीय मंत्री सत्यपाल सिंह, रालोद प्रमुख अजित सिंह और सिवाल खास (मेरठ) विधायक जितेंद्र सतवाई सांत्वना देने पहुंचे हैं।

2004 से सीआरपीएफ में तैनात शहीद के परिजनों ने पूरी रात विनोद की पत्नी से यह बात छिपाए रखी, लेकिन सुबह होने तक सभी को जानकारी मिली चुकी थी। परिजनों को सांत्वना देने के लिए स्थानीय जनप्रतिनिधियों, रिश्तेदारों व प्रशासनिक अधिकारियों का तांता लगा रहा।

घर में एकाएक लोगों की भीड़ देख बिलखती शहीद की पत्नी नीतू गुहार लगाती रही है कि कोई उनकी विनोद से फोन पर बात करा दें। अंतिम विदाई में बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की संभावना को देखते हुए पुलिस व प्रशासन ने तैयारी शुरू कर दी हैं।  शहीद के अन्तिम संस्कार में शामिल होने के लिए लोग दूर-दूर से ट्रैक्टर ट्राली से आए हुए हैं।

2004 में हुए थे भर्ती

परिवार के अनुसार, विनोद कुमार ने पढ़ाई के दौरान ही फोर्स में जॉब करने की ठान ली थी। इंटर की पढ़ाई उन्होंने पतला इंटर कॉलेज से की। पढ़ाई के साथ ही वह एनसीसी कैडेट भी रहे थे। 2004 में वह सीआरपीएफ में भर्ती हो गए थे। पिछले डेढ़ वर्ष से वह कुपवाड़ा जम्मू-कश्मीर में तैनात थे। उनकी शादी 2007 में बुलंदशहर के शिकारपुर निवासी नीतू से हुई थी।

मां-बाप को हो चुका है देहांत

विनोद कुमार चार भाइयों में सबसे छोटे थे और 92 बटालियन सीआरपीएफ के जवान थे। विनोद के माता पिता का कुछ समय पहले देहांत हो चुका है। शहीद विनोद कुमार के दो बच्चे हैं. जिनमें एक लड़का और एक लड़की है।&#8211 अभी वोट करें

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