मजदूरी कर गुजर बसर करने को मजबूर हुआ शहीद का परिवार

नई दिल्ली। 1965 में भारत-पाकिस्तान युद्ध में देश के लिए खुद को समर्पित करने वाला कांस्टेबल सूरजमल का परिवार सोनीपत के गांव आंवली में मजदूरी कर गुजर बसर कर रहा है।कांस्टेबल सूरजमल को मरणोपरांत 1967 में पुलिस पदक से सम्मानित किया गया था । वे बीएसएफ 22 बटालियन (तत्कालीन 20 बटालियन, पीएपी) में तैनात थे।

पिछले 52 वर्षों से पति की बहादुरी के लिए पुलिस पदक का सम्मान लेकर घूम रही वीरांगना निशक्त विद्या देवी का परिवार पेंशन और मजदूरी के सहारे जीवन व्यतीत कर रहा है।  पहले से ही आर्थिक तंगी से जूझ रही वीरांगना की मुश्किलें और बढ़ गईं, जब कैंसर ने उन्हें चपेट में ले लिया।

रविवार को जंतर मंतर पर प्रदर्शन के लिए अर्द्धसैनिक बलों के पूर्व सैनिकों के साथ-साथ शहीद की वीरांगनाएं भी पति की बहादुरी के लिए मिलने वाली सम्मान राशि की मांग के लिए पहुंचीं। कंफेडरेशन ऑफ एक्स पारा मिलिट्री फोर्सेज वेलफेयर एसोसिएशन के बैनर तले आयोजित प्रदर्शन में पुलिस पदक से सम्मानित कांस्टेबल सूरजमल की वीरांगना विद्या देवी और पोता सुनील भी मौजूद थे।

अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने बताया कि सम्मान मिलने के बाद 52 वर्षों के दौरान उन्हें पदक के अलावा न तो कोई राशि मिली और न ही कोई सुविधा। हां, पूरे परिवार को एकमात्र पेंशन का सहारा है।  देश की रक्षा में जान की बाजी लगा देने वाले बीएसएफ कांस्टेबल के परिवार को इस बात का मलाल है कि उन्हें 2015 में विज्ञान भवन में सम्मानित  किया गया, लेकिन सुविधाओं के नाम में पर कुछ भी नहीं मिल सका।

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