आतंकियों को पाकिस्तान में बात करने के लिए मुहैया कराया जाता है हाईटेक सिस्टम

कश्मीर में आतंकवाद को पाकिस्तान बढ़ावा दे रहा है, ऐसे बयान आते रहते हैं। भारतीय सेना और दूसरी एजेंसियां कई बार कह चुकी हैं कि पाकिस्तान में आतंकियों के ट्रेनिंग कैंप चल रहे हैं। इस बाबत पड़ोसी देश को पर्याप्त सबूत भी सौंपे जा चुके हैं। बालाकोट के आतंकी ट्रेनिंग कैंपों पर हुई एयर स्ट्राइक इस बात का ठोस प्रमाण है कि पाकिस्तान में ही आतंकी तैयार होते हैं। पुलवामा हमले की जांच कर रही एजेंसियों को अब कुछ ऐसे सबूत मिले हैं कि आतंकियों को रुपया-पैसा, हॉट-लाइन फोन और पाकिस्तानी वीजा भी मुहैया कराया जा रहा है। यह सब काम कश्मीर में बैठे पाकिस्तान के गुर्गे करते हैं।इन गुर्गों में कई नाम तो ऐसे हैं, जिन्हें पुलिस प्रोटेक्शन तक मिली हुई थी।बता दें कि पुलवामा में सीआरपीएफ काफिले पर हुए आतंकी हमले की जांच कर रही एजेंसियों को ऐसे सबूत मिले हैं कि आतंकियों को स्थानीय स्तर पर हर तरह की मदद पहुंचाई जा रही थी। आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सदस्यों को हवाला के जरिए पाकिस्तान और दुबई से आर्थिक सहायता भी मिल रही थी। इसके लिए कथित तौर पर कश्मीर के अलगाववादी नेताओं की मदद ली गई। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने 26 फरवरी को कई अलगाववादी नेताओं के ठिकानों पर छापे मारे थे।

इनमें जम्मू-कश्मीर लिब्रेशन फ्रंट के चेयरमैन यासीन मलिक, जम्मू-कश्मीर डेमोक्रेटिक फ्रीडम पार्टी के अध्यक्ष शब्बीर शाह, अवामी एक्शन कमेटी के चेयरमैन मीरवायज उमर फारुख, तहरीक-ए-हुर्रियत के चेयरमैन मोहम्मद अशरफ खान, एपीएचसी के महासचिव मशरत आलम, जेकेएसएम के चेयरमैन जफर अकबर भट्ट और सैयद अली गिलानी के पुत्र नसीम गिलानी शामिल हैं। इनके कब्जे से कई अहम दस्तावेज, जिनमें प्रॉपर्टी पेपर, बैंक स्टेटमेंट व रुपयों के लेन-देन से संबंधित अन्य कागजात आदि, बरामद किए गए हैं।

कुछ लेपटॉप, ई-टेबलेट, मोबाइल फोन, पेनड्राइव और डीवीआर सिस्टम भी मिले हैं। जांच एजेंसी ने इन नेताओं के घर-दफ़्तरों से कई आतंकवादी संगठनों के लैटर हैड और पाकिस्तान के शिक्षण संस्थानों में दाखिले के लिए वीजा फार्म भी बरामद किए गए हैं। इतना ही नहीं, मीरवायज उमर फारुख के निवास से हाई टेक इंटरनेट संचार उपकरण भी जांच एजेंसी के हाथ लगे हैं। खास बात है कि कश्मीर में अनेक अलगाववादी नेताओं को पुलिस सुरक्षा मिली हुई थी। पुलवामा की घटना के बाद केंद्र सरकार ने ऐसे सभी नेताओं की सुरक्षा वापस ले ली है।

जांच एजेंसी के सूत्रों का कहना है कि विदेश से आने वाला पैसा कथित तौर से कश्मीर के कई नेताओं के खातों में जाता रहा है। बाद में उस पैसे को विभिन्न संगठनों के नाम पर आतंकियों तक पहुंचाया जाता है। जांच एजेन्सी का दावा है कि जल्द ही ऐसे लोग बेनकाब होंगे। पिछले साल एनआईए ने कश्मीर घाटी में आतंकी फंडिंग के मामले में जो चार्जशीट दाखिल की थी, उसमें कश्मीरी अलगाववादियों का नाम सामने आया था। इनमें कई कारोबारी भी थे जो रुपयों का लेन-देन और उसे आगे बढ़ाने के मामले में अलगाववादियों की मदद कर रहे थे।
आफताब हिलाली शाह उर्फ शाहिद-उल-इस्लाम, अयाज अकबर खांडे, फारूक अहमद डार उर्फ बिट्टा कराटे, नईम खान, अल्ताफ अहमद शाह, राजा महराजुद्दीन कलवाल और बशीर अहमद भट उर्फ पीर सैफुल्लाह पर आपराधिक साजिश और भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने के आरोप लगे थे।इनके अलावा जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियों को प्रायोजित करने और पथराव करने वालों के लिए पाकिस्तान से धन प्राप्त करने का आरोप भी लगाया गया था।अल्ताफ अहमद शाह हार्डलाइन हुर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी के दामाद हैं, जो पाकिस्तान के साथ जम्मू-कश्मीर के विलय की वकालत करते हैं। इस्लाम उदारवादी हुर्रियत नेता मीरवाइज उमर फारूक का करीबी सहयोगी है। खांडे गिलानी के नेतृत्व वाले हुर्रियत के प्रवक्ता हैं। कश्मीर घाटी में अलगाववादियों और आतंकी गतिविधियों के लिए धन मुहैया कराने के लिए काम करने के आरोपी कारोबारी जहूर अहमद शाह वटाली को पिछले साल 17 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था। वह कथित रूप से पाकिस्तान से धन इकट्ठा कर रहा था।
पुलवामा हमले को अंजाम देने वाले आदिल डार और उसके साथियों, जिनकी संख्या करीब छह-सात है, को भी आर्थिक मदद पहुंचाई गई थी। आरडीएक्स और दूसरे विस्फोटकों को लाना, गाड़ी का इंतजाम व अन्य मदद, इन सब कामों के लिए जो पैसा खर्च हुआ, वह पाकिस्तान व दुबई से पहुंचा था। यह पैसा हवाला के जरिए लाया गया है। इसमें लोकल पुलिस की मदद से जांच एजेंसी ने प्रारंभिक तौर पर 35-40 अलगाववादी नेताओं के बैंक खाते चैक किए हैं।एक स्थानीय बैंक के अलावा जिन एजेंसियों के जरिए विदेशों से धन मंगाया जाता है, उनसे भी पूछताछ चल रही है। इस बात के पुख्ता सबूत मिले हैं कि पुलवामा हमला और उससे पहले जैश के सदस्यों को समय-समय पर अलगाववादी व कुछ दूसरे स्थानीय कारोबारी आर्थिक मदद पहुंचा रहे थे। इतना ही नहीं, अगर किसी आतंकी को पाकिस्तान में किसी से बात करनी होती तो उन्हें कथित तौर पर अलगाववादी नेताओं द्वारा उपलब्ध कराए गए होट लाइन या हाईटेक फोन मिल जाते हैं।

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