भारतीय फिल्म ‘पीरियड इंड ऑफ सेंटेंस’ को मिला ऑस्कर अवॉर्ड, जाने क्या थी फिल्म की कहानी

दुनिया के सबसे बड़े फिल्म पुरस्कार 91वें एकेडमी अवॉर्ड्स मतलब ऑस्कर पुरस्कार की घोषणा हो चुकी है और  यहाँ से भारत के लिए बड़ी खबर सामने आई है जो कि बहुत बड़ी खुशखबरी है।

खबर है कि फिल्म पुरस्कार 91वें एकेडमी अवॉर्ड्स शॉर्ट फिल्म केटेगरी में भारत क हापुड़ में बनी फिल्म पीरियड एंड ऑफ सेंटेंस को ऑस्कर पुरस्कार मिला है।  फिल्म पीरियड एंड ऑफ सेंटेंस ने शॉर्ट सब्जेक्ट केटेगरी में ऑस्कर का खिताब जीता है।

वही इस बारे में एक स्टेटमेंट जारी करते हुए गुनीत ने कहा है कि अकादमी को बहुत बहुत धन्यवाद हम सभी की मेहनत को सम्मान देने के लिए। यह फिल्म लास एंजेलिस से लेकर उत्तर प्रदेश के कथिकेरा तक की लड़कियों की कहानी है और मेहनत है। पीरियड एक सामान्य सी प्रक्रिया है और इससे किसी को भी अपने अचीवमेंट को हासिल करने से रोका नहीं जा सकता है।

उन्होंने कहा है कि यह लगभग दस साल की मेहनत है, गौरी चौधरी ने यहां इन लड़कियों को एजुकेट किया है। हर लड़की को इसके बारे में जानना चाहिए और पढ़ना चाहिए। यह फिल्म एक तरह से एक अहम बात कहती है। मैं बहुत सम्मानित महसूस कर रही हूं। मेलिसा और रायका के साथ यह फिल्म बना पाई। सिख्या प्रोड्कशन के जरिए फिल्म को फ्लोर पर पूरा किया। साथ ही नेटफ्लिक्स को भी शुक्रिया। गर्ल पावर की जय। मैं चाहती हूं कि हर महिला को देवी के रूप का दर्जा मिला। अब हमारे पास ऑस्कर है। आओ दुनिया बदल दें।

आपको बता दें कि, एकेडमी अवॉर्ड्स यानि ऑस्कर पुरस्कार रविवार 24 फरवरी को रात आठ बजे अमेरिका में दिए गए। 25 फरवरी की सुबह भारत के लिए अच्छी खबर लेकर आई।

फिल्म की कहानी, सब्जेक्ट और स्टारकास्ट भारतीय है। जानकारी के अनुसार ये डॉक्यूमेंट्री उत्तर प्रदेश के हापुड़ में रहने वाली लड़कियों के जीवन पर बनी है। इसमें दिखाया गया है कि कैसे आज भी हमारे समाज में गांवों में पीरियड्स को लेकर शरम और डर है। माहवारी जैसे अहम मुद्दे को लेकर लोगों के बीच जागरुकता की कमी है।

ये डॉक्यूमेंट्री 25 मिनट की है। इस डॉक्यूमेंट्री में रियल स्टार्स ने काम किया है। इसे बनाने में कैलिफोर्न‍िया के ऑकवुड स्कूल के 12 छात्रों और स्कूल की इंग्ल‍िश टीचर मेलिसा बर्टन का अहम योगदान है।

इस डॉक्यूमेंट्री की शुरूआत में गांव की लड़कियों से पीरियड के बारे में सवाल पूछा जाता है। पीरियड क्या है? ये सवाल सुनकर वे शरमा जाती हैं। बाद में ये सवाल लड़कों से किया जाता है। जिसके बाद वे पीरियड को लेकर अलग-अलग तरह के जवाब देते हैं। एक ने कहा- पीरियड वही जो स्कूल में घंटी बजने के बाद होता है। दूसरा लड़का कहता है ये तो एक बीमारी है जो औरतों को होती है, ऐसा सुना है।

कहानी में हापुड़ की स्नेहा का अहम रोल है। जो पुलिस में भर्ती होना चाहती है। पीरियड को लेकर स्नेहा की सोच अलग है। वे कहती है जब दुर्गा को देवी मां कहते हैं, फिर मंदिर में औरतों की जाने की मनाही क्यों है। डॉक्यूमेंट्री में फलाई नाम की संस्था और र‍रियल लाइफ के पैडमैन अरुणाचलम मुरंगनाथम की एंट्री भी होती है। उन्हीं की बनाई सेनेटरी मशीन को गांव में लगाया जाता है।

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