सलाइवा पर पाबंदी लगाने से अब गेंदबाजों को होगा फायदा: जो रूट


लंदन: इंग्लैंड की टेस्ट टीम के कप्तान जो रूट को लगता है कि COVID-19 महामारी के बाद गेंद को चमकाने के लिए लार के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने से वास्तव में गेंदबाजों के कौशल में सुधार हो सकता है, जिन्हें पिच से बाहर निकलने के लिए अधिक प्रयास करना होगा। पूर्व भारतीय कप्तान अनिल कुंबले की अध्यक्षता वाली आइसीसी की कमेटी ने कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए गेंद पर लार या थूक लगाने पर पाबंदी लगाने की सिफारिश की थी।

इंग्लैंड की टीम के धाकड़ बल्लेबाज जो रूट गेंद पर लार नहीं लगाने के पक्ष में हैं और उन्होंने कहा है कि ये हमारे पक्ष में होगा और इससे स्किल्स का स्तर बढ़ेगा। मेट्रो.को.यूके से बात करते हुए जो रूट ने कहा है, “किसी भी प्रकार की सहायता न मिलने जो सामान्य रूप से हो सकता है वह यह है कि आपकी सटीकता में सुधार होगा।”

जो रूट ने आगे कहा है, “खिलाड़ियों को पिच से कुछ मदद पाने के लिए कोई न कोई नया तरीका खोजना होगा, चाहे वह थोड़ा अधिक प्रयास हो, क्रीज पर कोणों को बदलना, वब्बल सीम का उपयोग करना जो उनके लॉकर में नहीं हो सकता है। इसे हमारे गेंदबाज चार या पांच सप्ताह की अवधि में विकसित कर सकते हैं।”

इस मुद्दे पर वर्तमान और पूर्व क्रिकेटर अपनी अलग-अलग राय रखते हैं। ब्रैट ली मानते हैं कि जो खिलाड़ी 8 साल की उम्र से गेंद पर सलाइवा का प्रयोग कर रहा है। उसके लिए इसे छोड़ना आसान नहीं है। वहीं, कंगारू टीम के ही एक और तेज पैट कमिंस ने कहा है कि गेंद और बल्ले के इस खेल को समान करने के लिए कोई और विकल्प तलाशना होगा। इसके अलावा वेस्टइंडीज के तेज गेंदबाज माइकल होल्डिंग को लगता है कि कृत्रिम पदार्थ पर भरोसा नहीं किया जा सकता। दिग्गज स्पिनर शेन वार्न ने सुझाव दिया है कि गेंद के एक हिस्से को भारी बना दिया तो आपको गेंद की चमक बरकरार रखने के लिए सलाइवा की जरूरत ही नहीं पड़ेगी।



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