महिलाओं के लिए खुशखबरी, ऐसे डिप्रेशन से मिल सकेगी राहत

मां बनने का अहसास हर महिला के लिए खास होता है. वो उसके जीवन में एक ऐसा सुखद अनुभव होता है जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है. लेकिन मां बनते ही हर महिला की जिदंगी काफी हद तक बदल जाती है. उनमें कई मानसिक, शारीरिक परिवर्तन दिखे जा सकते हैं. आमतौर पर कुछ परिवर्तन तो ऐसे होते हैं जिसे हर महिला अनुभव करती है लेकिन कई महिलाओं की स्थिति काफी चिंताजनक होती है. उन्हें मूड स्विंग होने लगते हैं. जिसमें उन्हें कई बार आत्महत्या तक करने का मन करता है. इस तरह की स्थिति को पोस्टपार्टम डिप्रेशन कहा जाता हैं. अभी तक मेडिकल साइंस के पास पोस्टपार्टम डिप्रेशन का इलाज मौजूद नहीं था, लेकिन अब डॉक्टरों ने ऐसी दवा का आविष्कार किया है, जिसे महिलाओं के लिए वरदान माना जा रहा है. इस दवा की मदद से महिलाओं को अपनी इस समस्या से उबरने में मदद मिल सकेगी.

आइए जानते हैं इस नई दवाई के बारें में-

द फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने जुलरेसो नाम की दवाई को हरी झंडी दिखा दी है जो पोस्टपार्टम डिप्रेशन से लड़ने में महिलाओं की मदद करेगी. ये दवा ब्रेक्सानोलोन ड्रग के अंदर आएगी जो मार्केट में 13,76,440 रुपये तक की कीमत में उपलब्ध होगी. बता दें, पोस्टपार्टम डिप्रेशन से लड़ने में महिलाओं की मदद करने वाली ये पहली दवा है.पोस्टमार्टम डिप्रेशन को एक खतरनाक बीमारी माना जाता है जो अक्सर गर्भवती महिलाओं में देखने को मिलती है. इस बीमारी के कारण महिलाएं काफी उदासीन हो जाती हैं और कई बार अपनी जिदंगी को खत्म करने की कोशिश भी करती हैं. ऐसी परिस्थिति में मां की सेहत के साथ बच्चे का विकास भी प्रभावित होता है. अकेले अमेरिका में इस बीमारी से चार लाख महिलाएं पीड़ित हैं.

लेकिन अब चिंता की बात नहीं है. अब जुलरेसो दवा के माध्यम से इस बीमारी का इलाज संभव है. बता दें, ये इलाज पूरे 60 घंटो तक चलता है और महिलाओं की नसों में इस दवाई को इंजेक्ट किया जाता है. इस दवा को लेने के बाद महिलाओं को सिर दर्द, चक्कर और थकावट जैसी शिकायत हो सकती है. मनोवैज्ञानिक समंथा मेल्टजर ब्रोडी के अनुसार इस ड्रग से पोस्टपार्टम डिप्रेशन को सिर्फ 2.5 दिनों में ठीक किया जा सकता है. वैसे समंथा इस ड्रग के क्लीनिकल ट्राइल में भी शामिल थीं.

आपको बता दें, आपको ये दवा सिर्फ डॉक्टर के क्लीनिक में ही उपलब्ध होगी. इस दवा पर ‘ बॉक्स वार्निंग’ लिखा हुआ मिलेगा. दरअसल ‘ बॉक्स वार्निंग’ अमेरिका में कुछ दवाइयों के ऊपर लिखा जाता है जिसका मतलब होता है कि इस दवा के कई साइड इफेक्ट भी हो सकते हैं.

बता दें, एफडीए ने इस दवा को स्वीकृति भले ही दे दी हो लेकिन उनके अनुसार इस दवा के कई साइड इफेक्ट भी हैं जो स्तनपान करवाते समय मां से बच्चे में आ सकते हैं. हालांकि इस दवा का बच्चों पर कितना असर पड़ेगा, ये अभी भी एक शोध का विषय है. बताते चले ये पोस्टमार्टम डिप्रेशन को ठीक करने के लिए पहली दवा जरूर है लेकिन आखिरी नहीं. फिलहाल एक ऐसी दवा का ट्राइल चल रहा है जो एक गोली के रूप में होगी और उसे बस दिन में एक बार खाना होगा. अभी तक उस दवा के तीन सफल ट्राइल भी हो चुके हैं.

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